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कराधान क्या हैं? हमे कर क्यों भरना चाहिए?

What is taxation? Detailed knowledge by Jain Account

किसी भी देश में सरकार का संचालन करने और देश को चलाने के लिए देश में एक मूल्य लिया जाता हैं। यह मूल्य अलग अलग तरीकों से आम आदमी सरकार तक पहुंचाता हैं।

इसके लिए एक कर प्रणाली बनाई जाती हैं जिससे जनता वह मूल्य कर के रूप में सरकार को देती हैं। आप मे से अधिकांश लोगों को कर के बारे में थोड़ा बहुत मालूम ही होगा। आप सभी लोगो के लिए यह लेख उपयोगी साबित होगा।

इस लेख के माध्यम से हम कर प्रणाली को बेहतर तरीके से समझने का प्रयास करेंगे। और कर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को सांझा करेंगे।

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What are the advantages of taxation?
What are the disadvantages of taxation?
Some basic questions related to tax.
Conclusion.

कराधान क्या हैं?

किसी भी देश की सरकार द्वारा सार्वजनिक राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने और सरकार का संचालन करने के लिए देश की जनता से किसी भी तरह से लिया गया वित्तीय शुल्क कर कहलाता हैं।

कोई भी सरकार अपने नागरिकों को सर्वोत्तम सुविधा या उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर लेती हैं।

reason of taxation

आसान भाषा में देखें तो
किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा अपनी बुनियादी आवश्यकताओं से अधिक लाभ अर्जित करने पर वह सरकार को अपनी आय का कुछ हिस्सा योगदान के रूप में देता हैं। उस योगदान को कर कहा जाता हैं।

यह कर अलग अलग रूप में दिया जा सकता हैं। जो राज्य के वितपोषण में सहायक होता हैं।

महान अर्थशास्त्री चाणक्य कराधान के बारे में कहते हैं कि किसी भौंरे द्वारा फूल से परागकण चुनने जितना कराधान होना चाहिए। यहां भौंरे को सरकार, फुल को जनता और परागकण को कर से संबोधित किया गया है।

किसी भी सरकार को अपनी जनता से उतना कर लेना चाहिए जितना वह देने में सक्षम हो। जिससे जनता पर अधिक कर का बोझ नहीं पड़े और सरकार का संचालन भी अच्छे से हों सके।

सरकार एकत्रित कर से अपने राज्य को चलाने तथा अपनी अर्थव्यवस्था और जनता के हित में उपयोग किया जाता हैं। जिससे राज्य की प्रगति हो और वहा के लोग खुशहाल जीवन व्यतीत कर सके।

कराधान का इतिहास क्या हैं?

पुरातत्व विभाग के अनुसार सबसे पहले कर प्रणाली ३००० से २८०० ईसा पूर्व मिश्र में हुई थी। इसके बाद कई राज्यों में शासन व्यवस्था स्थापित हुई। और धीरे धीरे कर प्रणाली लागू होने लगी।

भारत के इतिहास में वर्षो से कर प्रणाली का महत्त्व रहा हैं। सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले राम राज्य में भी कर लागू होता था। प्राचीन काल से ही राजा अपनी प्रजा से कर के रूप में कुछ राशि लिया करते थे।

हिंदू धर्म के अनुसार फसल पकने से पहले कर लेने वाला मध्यम श्रेणी का राजा होता हैं और अकाल की स्थिति में अपनी प्रजा को कष्ट देकर कर लेने वाला निम्न श्रेणी का राजा होता हैं।

फसल पकने के बाद कर लेने वाला उच्च श्रेणी का राजा होता हैं। और वह राज्य राम राज्य होता हैं। अर्थात सफल व्यक्ति से कर लेना चाहिए।

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इसके बाद महाभारत काल में भी कर व्यवस्था प्रणाली थी। फिर चाणक्य नीति ने तो पूरी कर प्रणाली को ही एक नया रूप दे दिया था। आज भी कर प्रणाली में चाणक्य की कई नीतियों को अपनाया जाता हैं। और अर्थशास्त्र कर प्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं।

मनुस्मृति और अर्थशास्त्र में कई प्रकार के करों का वर्णन मिलता हैं। जिसके अनुसार राजा कर लगा सकता हैं। जिसका संबंध प्रजा की आय और व्यय से होना आवश्यक हैं।

भारत में कर कितने प्रकार के होते हैं?

वैसे तो कर को कई तरह से लिया जाता हैं। पर लोगो द्वारा इन करों को आसानी से समझने के लिए इनका वर्गीकरण किया गया हैं। अगर आपको नही पता तो हम आपको बता दे कि भारत में कर को मुख्यत: दो भागो में वर्गीकृत किया गया हैं :-

प्रत्यक्ष कर

लोगो द्वारा सरकार को सीधा दिया जाने वाला कर प्रत्यक्ष कर होता हैं। इसमें आयकर, पूंजीगत लाभ कर और संपति कर इत्यादि आते हैं।

अप्रत्यक्ष कर

लोगो द्वारा सरकार को किसी माध्यम से दिया जाने वाला कर अप्रत्यक्ष कर होता हैं। इसमें माल और सेवा कर, मूल्य वर्धित कर और मनोरंजन कर शामिल हैं।

कर प्रणाली में कानून व्यवस्था क्या हैं?

किसी भी तरह की कर प्रणाली में उनके अपने कानून लागू होते हैं। कोई एक कर प्रणाली किसी दूसरे कर प्रणाली को गलत नही बता सकती हैं। पर सभी कर प्रणाली आपस में परस्पर जुड़े हुए होते हैं।

सभी कर प्रणाली में किसी भी तरह से कर की चोरी करने या छिपाने के लिए दंड या जुर्माने का प्रावधान हैं। यह विधिक अध्ययन का महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

कर की विशेषताएं क्या हैं?

कर को लागू करने के पीछे उसका उद्देश्य राज्य का हित होता हैं। इसलिए कर को लागू करने से पहले उनकी विशेषताओं को देखा जाता हैं।

कुछ निम्न विशेषताएं उपलब्ध हैं

  • अनिवार्य कर भुगतान।
  • एकत्रित कर को सबके हित में व्यय करना।
  • कोई विशेष सेवा उपलब्ध नहीं।
  • सरकार द्वारा नियंत्रण।
  • जनता द्वारा भुगतान।

कराधान के क्या लाभ हैं?

कराधान को राज्य या देश और प्रजा के हित के लिए लागू किया जाता हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार को देश संचालन के लिए धन उपलब्ध करवाना होता हैं। इसके अलावा कई और लाभ मिलता हैं

  • सरकार और देश का संचालन।
  • मुद्रास्फीति की बचत।
  • जन परिवहन।
  • शिक्षा व्यवस्था।
  • दैनिक आवश्यकता जैसे पानी, ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली।
  • रोजगार के लाभ।
  • राज्य और सरकारी कर्मचारियों का वेतन।
  • व्यापारिक कार्यों में वृद्धि में सहायता।
  • ऋण व्यवस्था।
  • सार्वजनिक बीमा।
  • सेवा निवृत्त योजनायें।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य।
  • सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का वित्तपोषण।
  • विकास और कल्याणकारी परियोजनाएं।
  • रक्षा व्यय।
  • कानून प्रवर्तन।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान।

कराधान के क्या नुकसान हैं?

किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन द्वारा अर्जित की हुई आय को गवाना अच्छा नहीं लगता हैं। कर वैसे तो लोगो की भलाई के लिए लगाया जाता हैं। ताकि उसी कर की धनराशि से देश का विकास किया जा सके।

लेकिन कुछ चीजों में यह नुकसान भी करता है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही किसी चीज के फायदे और नुकसान भी होते हैं। कर से होने वाले कुछ नुकसान

  • मूल्य वृद्धि
  • आय में कटौती
  • दंड
  • जुर्माना

कर से संबंधित कुछ बुनियादी सवाल।

कुछ लोगो के मन में कर को लेकर काफी महत्वपूर्ण सवाल होते हैं। जिनकी जानकारी इंटरनेट पर प्राप्त मुश्किल से होती हैं। हम इनमे से कुछ सवाल ले रहे हैं। अगर आपका भी कर से संबंधित कोई सवाल हो तो हमारे साथ सांझा अवश्य करें। कुछ सवाल जवाब

क्या हर किसी को कर भरना जरूरी होता हैं?

अप्रत्यक्ष रूप से प्रति व्यक्ति को किसी न किसी रूप में कर देना होता हैं। प्रत्यक्ष रूप से कर एक निश्चित आय के ऊपर दिया जाता हैं।

क्या हर देश कर लगाता है?

किसी भी देश के लिए कर राशि एकत्र करने का माध्यम होता हैं। कुछ देश ऐसे भी हैं जहां प्रत्यक्ष कर नही लगता हैं। वहा सरकार के पास अप्रत्यक्ष कर और उसके अलावा अन्य तरीकों से राशि मिलती रहती हैं।

इनमे से कुछ देश सऊदी अरब अमीरात, कुवैत, बहरैन और ब्रूनेई जैसे पेट्रोल से संपन्न देश है। तो कुछ मालदीव, मोनाको और आइसलैंड जैसे भ्रमणीय देश हैं। इसके अलावा काफी देश हैं।

क्या अप्रत्यक्ष कर हर जगह लगता हैं?

यह जरूरी नहीं! आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दैनिक जीवन में अतिआवश्यक वस्तुओ को कर मुक्त रखा गया हैं। जिसमे किसी भी प्रकार का कर नही लिया जाता हैं। जैसे कच्ची सब्जियां। कुछ देश ऐसे कई तरह के कर लाभ देते हैं।

में/हम कर क्यों भरे।

कर भरना देश के हर नागरिक का कर्तव्य होता हैं। इससे आप अप्रत्यक्ष रूप से अपने देश का संचालन और विकास करने में मदद करते हैं।

कर की उत्पति पहले कहा हुई?

कुछ पुरातत्त्व के अनुसार सबसे पहले कर मिश्र में लागू किया गया था। किंतु भारतीय संस्कृति के इनसे कई पुराने ग्रंथो में कर का वर्णन मिलता हैं। जिसमे मनुस्मृति सबसे पुराना ग्रंथ है। इसके अलावा वेदों में भी राजनीतिक प्रणाली के अध्याय में कर के बारे में बताया गया हैं।

कर सुधार के जनक कोन है?

राजा जेसुदास चेल्लियाह ने प्रत्यक्ष कराधान प्रणाली में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके लि। एमएल ए 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। और इन्हे “कर सुधारों के पिता” के रूप में जाना गया।

कर जमा कोन करता हैं?

सरकार द्वारा संचालित कर अधिनियम
के तहत कर अधिग्रहण के लिए एक संगठन का निर्माण किया जाता हैं जो कर एकत्रित करते हैं।

जैसे आयकर विभाग द्वारा आयकर प्रबंधन किया जाता हैं। और सीबीआईसी द्वारा जीएसटी प्रबंधन किया जाता हैं। और इन सबको वित्त मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता हैं।

निष्कर्ष

इस लेख में हमने कर के बारे में गहन अध्ययन किया। और जाना की कर क्या हैं? इसका इतिहास क्या हैं? इससे लोगों और सरकार को क्या फायदे या नुकसान हो सकते हैं।

साथ हमने कुछ बुनियादी सवाल पर भी चर्चा की जिससे कर को समझने में आसानी हो। आगे हम कर और उनके प्रत्येक प्रकार को बेहतर तरीके से समझने का प्रयास करेंगे।

व्यापार, वित्तीय, लेखांकन और कराधान संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारा अनुसरण करें। अगर लेख पसंद आया हो तो अपने मित्रों और रिश्तेदारों से सांझा अवश्य करें।

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