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अप्रत्यक्ष कर क्या हैं?

What is indirect Taxes?

अप्रत्यक्ष कर लोगो को बिना बताए लिया जाने वाला कर होता हैं। आप सभी ने किसी न किसी रूप में कर के बारे में सुना ही होगा। अगर आपने कभी भी कराधान जैसी कोई बात नहीं सुनी हैं या इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको नीचे दिया गया लेख अवश्य पढ़ना चाहिए।

अगर आप कर प्रणाली को अच्छे तरीके से समझना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लेख को विस्तार से पढ़े। यह लेख आपको किसी देश की कर प्रणाली को समझने में मदद करता हैं।

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हर देश अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए लोगो से कर वसूल करता हैं। यह कर लोगो को बताकर (प्रत्यक्ष) या बिना बताए (अप्रत्यक्ष) रूप से लिया जाता हैं। यह कर सरकारी राजस्व के प्रमुख घटक होते हैं। जिससे सरकार या देश या राज्य को चलाने में मदद मिलती हैं। इसलिए यह देश के लिए महत्वपूर्ण भी है।

आपके मन में अप्रत्यक्ष कर को लेकर काफी सवाल उत्पन्न हो रहें होंगे। साथ ही आप इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए काफी उत्साहित भी हो रहे होंगे। क्योकि यह सभी तरह की अर्थव्यवस्था से गहन रूप से जुड़ा हुआ है। इन करों को संगृहीत करके सरकार के साथ ही देश का कल्याण भी हो सकता है।

इस लेख में हम आपके उत्साह को कायम रखते हुए अप्रत्यक्ष कर के बारे में जानकारी सांझा करेंगे। साथ ही आपको बताएंगे कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अप्रत्यक्ष कर महत्वपूर्ण क्यों हैं?

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अप्रत्यक्ष कर क्या हैं?

किसी भी राज्य, देश या सरकार द्वारा अपने नागरिकों से उनकी जानकारी के बिना लिया गया कर अप्रत्यक्ष कर कहलाता हैं। इनसे लोगों से सीधा कर न लेकर किसी माध्यम से लिया जाता हैं। यह माध्यम भौतिकवादी वस्तु, सेवा या मनोरंजन हो सकता हैं।

सरकार और नागरिक के मध्य सीधा संबंध न होने के कारण इस कर को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित किया जा सकता हैं। अर्थात ऐसे कर जिन्हे किसी अन्य व्यक्ति या संस्था या संगठन को स्थानांतरित किया जा सके वह अप्रत्यक्ष कर होता हैं।

यह कर सामान्यतः निर्माता या आपूर्तिकर्ता से लिया जाता हैं। किंतु इसका पूरा बोझ उपभोक्ता पर जाकर लगता हैं। इसलिए यह प्रत्यक्ष करों की तुलना में अत्यधिक स्पष्ट नहीं होता हैं। यह कर बिना किसी भेदभाव के समाज के प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता हैं। जो किसी की आय के आधार पर तय नहीं किया जाता हैं।

अप्रत्यक्ष कर के अंतर्गत कर के लिए भुगतान करने वाला और कर का बोझ सहन करने वाला व्यक्ति अलग होता हैं। करों का बोझ हमेशा उपभोक्ताओं पर आता हैं जबकि निर्माता या विक्रेता इनसे लेकर सरकार को भरते हैं। इसे परोक्ष कर या उपभोग कर भी कहा जाता हैं।

अप्रत्यक्ष कर की परिभाषाएं

अप्रत्यक्ष कर को लेकर हर देश की अपनी मान्यता हैं। कई अर्थशास्त्री ने इन्हें अलग – अलग तरीकों से परिभाषित किया हैं। जिनके विचार समान रूप से व्यक्त होते हैं।

(1) डाल्टन के अनुसार, “परोक्ष कर एक व्यक्ति पर लगाया जाता है, परन्तु इसका भुगतान पूर्णतया या अंशतया दूसरे व्यक्ति द्वारा किया जाता है।”

(2) मिल के अनुसार, “परोक्ष कर वह है जो एक व्यक्ति से इस इच्छा और आशा से मांगा जाता है कि वह अपनी क्षतिपूर्ण दूसरे से कर लेगा।”

(3) जे.जे. मेहता के अनुसार, “परोक्ष कर वहकर है जिसको भुगतान करने वाला व्यक्ति पूर्णतया या अंशतया अन्य व्यक्तियों पर टाल देता है।”

(4) डी. मार्कों के अनुसार, “बचाई गई आय का अनुमान परोक्ष रूप से तब लगाया जाता है जब वह उस आय को व्यय करता है तथा तब जो कर लगाया जाता है वह परोक्ष कर कहलाता है।”

(5) बैस्टेबिल के अनुसार, “कभी-कभी तथा विशेष अवसरों पर लगाये जाने वाले कर परोक्ष कर होते हैं।”

(6) फिण्डले शिराज के अनुसार, “प्रत्यक्ष करों के अतिरिक्त अन्य सभी करों क परोक्ष करों के समूह में सम्मिलित किया जा सकता है- व्यापार, मनोरंजन, बिक्री तथा बाजी लगाने पर करों को परोक्ष करों में सम्मिलित किया जायेगा।”

अप्रत्यक्ष कर महत्वपूर्ण क्यों हैं

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अप्रत्यक्ष कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। अप्रत्यक्ष कर किसी भी देश को न केवल आर्थिक रूप योगदान करता हैं बल्कि लोगों के बीच स्थिरता बनाए रखता हैं।

भारत में अप्रत्यक्ष कर

भारत में भी कई तरह के अप्रत्यक्ष कर लागू हैं। जो राज्य और केंद्र अपने अनुसार लगाते हैं। वर्ष 2017 के बाद से भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों की सहमति से एक राष्ट्र एक कर के रूप में जीएसटी लागू किया था। जिसमे कही अप्रत्यक्ष करों को मिलाया गया था। अभी भी कुछ अप्रत्यक्ष कर राज्य सरकार के अधीन हैं।

अप्रत्यक्ष कर के प्रकार क्या हैं?

जैसा कि आप जानते हैं हर देश में अप्रत्यक्ष कर कई तरीकों से लगाया जाता हैं। अप्रत्यक्ष कर मूल रूप से किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को दिए जाते हैं। काफी लोग इस बात से अनजान होते हैं कि वह अपने दैनिक जीवन में किसी न किसी प्रकार से अप्रत्यक्ष कर का भुगतान करते हैं। आज हम उन्हीं प्रकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। यह प्रकार निम्न हैं –

केंद्रीय बिक्री कर

निर्माता कंपनी जब किसी वस्तु को बाजार में बिक्री के लिए लाती हैं। तब उसके मूल्य के साथ बिक्री कर जोड़ दिया जाता हैं। और जब उपभोक्ता द्वारा किसी वस्तु का भुगतान किया जाता हैं तो उसके अंतिम मूल्य में बिक्री कर शामिल होता हैं।

उत्पाद शुल्क

हर देश में सरकार द्वारा निर्माताओं से उत्पाद के उत्पादन पर शुल्क लिया जाता हैं। अर्थात उत्पादित या निर्मित वस्तुओं पर लगने वाला कर उत्पाद शुल्क होता हैं। निर्माता उत्पाद शुल्क को उसके मूल्य में जोड़कर उसकी बिक्री करते हैं। जिसका बोझ उपभोक्ता पर पड़ता हैं।

सीमा शुल्क कर

जब कोई वस्तु किसी अंतराष्ट्रीय सीमा को पार कर एक देश से दूसरे देश में जाती हैं। तब आयातक देश द्वारा उस वस्तु पर सीमा शुल्क लगाया जाता हैं। इसलिए आयात की गई वस्तु अक्सर महंगी होती हैं।

गैस कर

पेट्रोल, डीजल, ईंधन, तरल पेट्रोलियम गैस और संपीडित प्राकृतिक गैस जैसे कई गैसीय वस्तुओं पर सरकार गैस कर लेती हैं। यह कर राजस्व में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

माल और सेवा कर (जीएसटी)

यह कर वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता हैं। इसमें कई करों को शामिल किया गया हैं। जीएसटी पूरे देश में समान रूप से लगने के कारण पारदर्शिता का काम करता हैं। इससे अलग अलग तरीकों से लगने वाले कर समाप्त हो जाता हैं। अधिक जानें

सेवा कर

किसी भी उपभोक्ता द्वारा उपभोग की गई सेवाओं पर लगने वाला कर सेवा कर होता हैं। यह कर सेवाप्रदाता द्वारा उपयोगकर्ता से लिया जाता हैं।

मूल्य वर्धित कर (VAT)

यह कर उत्पाद की बिक्री पर लगाया जाता हैं। निर्माता किसी उत्पाद में मूल्य वर्धित कर जोड़कर उसके अंतिम मूल्य को बढ़ाता हैं।

मनोरंजन कर

मनोरंजन के लिए किए गए कार्य के ऊपर लगने वाला कर मनोरंजन कर होता हैं। उपभोक्ता इसका उपयोग आनंद लेने के लिए करते हैं।

स्टाम्प ड्यूटी

किसी भी व्यक्ति द्वारा अपनी अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर सरकार द्वारा स्टाम्प ड्यूटी के रूप में कर लगाया जाता हैं। इसके अलावा यह सभी प्रकार के कानूनी दस्तावेजों पर लागू होता हैं। और यह सामान्य दरों से अलग हो सकता हैं।

प्रतिभूति लेनदेन कर

जब कोई व्यक्ति शेयर बाजार में व्यापार करता हैं तब सरकार प्रतिभूति कर लगाती हैं।

लाभांश वितरण कर

कोई भी बड़ी कंपनी अपने लाभ का हिस्सा अपने निवेशकों में विभाजित करती हैं। तब उसे लाभांश वितरण कर भरना होता हैं। यह कर कंपनी का करदाता श्रेणी में नही होने के बाद भी भरना आवश्यक हैं।

टोल कर

परिवहन विभाग द्वारा परिवहन मार्ग का उपयोग करने पर कर के रूप में कुछ राशि को एकत्रित किया जाता हैं। जिसे टोल कर के नाम से जाना जाता हैं।

इसके अलावा कई अन्य अप्रत्यक्ष कर भी लगते हैं। हम प्रत्येक कर प्रणाली को विस्तार से समझेंगे। और सबके लिए अलग लेख बनाएंगे।

निष्कर्ष

इस लेख में हमने अप्रत्यक्ष कर के बारे में जानकारी प्राप्त की। अलग अलग दृष्टिकोण से इनकी अलग परिभाषाएं को भी देखा। साथ ही इसकी अहमियत और भारत में अप्रत्यक्ष कर की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इसके अलावा किस प्रकार के अप्रत्यक्ष कर लगते हैं इस बारे में जाना। अगर इस लेख में आपको कोई सवाल या राय बताना हो तो आप टिप्पणी कर सकते हैं।

व्यापार, वित्तीय, लेखांकन और कराधान संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारा अनुसरण करें। अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ सांझा अवश्य करें।

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