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Mishti Yojana के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

mishti yojna details

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जब 2023- 24 के बजट को पेश किया तो अपने भाषण के अंतर्गत उन्होंने Mishti Yojana के बारे में परिचित कराते हुए इसके कार्यान्वयन के लिए बचत की घोषणा की। 

मैंग्रोव यानी सदाबहार वन हमारी धरती पर एक बहुमूल्य पारिस्थितिक तंत्र में से सर्वश्रेष्ठ है। इस प्रकार के वन अधिकांश तटीय क्षेत्रों में मिलते हैं और तट रेखाओं की रक्षा करने को सर्वोत्तम बनाए रखने और समुद्री प्रजातियों की अलग-अलग श्रेणियां के लिए रहने की जगह देते हैं। 

प्रकृति में इतना सहयोग और महत्व रखने वाले इस प्रकार के वनों को भी त्रासदी से गुजरना पड़ रहा है। इनका कटाव हो रहा है जिसके लिए कई मानवीय गतिविधियां भी जिम्मेदार है। जिसके कारण यह तीव्रता से विलुप्त हो रहे हैं।

इस समस्या को दूर करने के लिए देश के अलग-अलग को मूर्त लाभ प्रदान करने के लिए मिष्टी (तटीय क्षेत्रों और मूर्त आय के लिए सदाबहार वन रोपण पहल) योजना का शुभारंभ किया गया है। 

मिष्टी योजना के मुख्य दो उद्देश्य है। जिसके अंतर्गत वनों का संरक्षण और किसानो को गरीबी से राहत देना और दोनों ही समस्याओं का समाधान करना है

और इसे प्रारंभ करने का मकसद मैंग्रोव जो की सदाबहार वन है उनकी सुरक्षा करना और उनमें बढ़ोतरी करने के लिए सभी को उत्साहित करना मौजूद है। जिससे कि वहां मौजूद समुदायों की आजीविका में बढ़ोतरी हो सके। 

Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes योजना को इंडोनेशिया, श्रीलंका और भारत जैसे कई देशों में क्रियान्वित किया जा रहा है और इस योजना को लागू करने के बाद जो परिणाम है उसके कारण अन्य देशों को भी आकर्षित होने पर विवश होना पड़ रहा है। 

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मिष्टी योजना 2023 संक्षिप्त परिचय 

 मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटैट्स एंड टैंजिबल इनकम स्कीम या तटीय क्षेत्रों और मूर्त आय के लिए सदाबहार वन रोपण पहल योजना का सबसे बड़ा मकसद उन जगहों और उनके समीपवर्ती रहने वाले समुदायों के लिए आजीविका को बढ़ावा देने के अतिरिक्त मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करना और उसे बढ़ाने के लिए कारगर है। 

 इस योजना का मुख्य लक्ष्य गरीबी कम करना है और यह योजना भारत समेत इंडोनेशिया और श्रीलंका साथ ही साथ बहुत से देश में चल रही है। 

Mishti yojana के उद्देश्य क्या है?

मिष्टी योजना के कुछ खास उद्देश्य निम्न है 

1. लोगों की आजीविका में बढ़ोतरी करना- 

मिष्टी योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि मैंग्रोव और सदाबहार वन के पारिस्थितिक तंत्र में और उसके निकटवर्ती समुदायों के लिए मजदूरी वेतन या रोजगार के लिए बाकी मुआवजे के अलावा अन्य स्रोतों से प्राप्त वैध बनाकर और मैंग्रोव संसाधनों पर कमजोर देकर स्थाई आजीविका विकल्पों को अग्रसर करना है। 

2. मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण और उन्नति- 

मैंग्रोव वनों की कमी के जो खास कारण है जैसे कि प्रदूषण, अधिक वनों की कटाई और जलवायु का परिवर्तन, को नियंत्रित और काम करके मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और उन्नति को बढ़ावा देना। 

3. क्षमताओं को उजागर करना और समुदाय आधारित प्रबंध करना 

निर्णय लेने के लिए और प्रबंधन प्रक्रिया में उन्हें उपस्थित करने और उन संसाधनों का स्वामित्व लेने के लिए समुदायों की क्षमता का निर्माण करना जिस पर वे निर्भर है।

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Mishti Yojana से क्या लाभ है?

Mishti Yojana से समुदाय को मिलने वाले लाभ कुछ खास निम्न है: 

 1. धनार्जन का सही तरीका 

मिष्टी योजना के अंतर्गत इन समुदायों को वैकल्पिक आजीविका विकल्प दिए गए हैं।  मैंग्रोव संसाधनों पर उनकी धन और जीवन चलने के लिए जो निर्भरता है वह काम की गई है और उनके जीवन स्तर और आर्थिक स्थिति में भी सुधार किया गया है। 

2. सभी समुदायों की भागीदारी में बढ़ोतरी 

मिष्टी योजना के अंतर्गत समुदायों को अपने संसाधनों का उपयोग करने और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार दिया है। 

3. स्वास्थ्य में वृद्धि 

 मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र में जो सुधार हुए हैं उसके कारण बेहतर हवा और पानी के साथ-साथ वातावरण की स्थिति में भी सुधार किया है जिसके कारण वहां पर रहने वाले समुदायों के लिए स्वच्छ हवा और पानी मिलने के कारण स्वास्थ्य और कल्याण में सहायता मिली है। 

Mishti Yojana का हमारे भारत देश पर पड़ने वाला प्रभाव 

 मिष्टी योजना का मैंग्रोव वृक्षारोपण और संरक्षण गतिविधियों में वहां पर रहने वाले समुदायों की आर्थिक स्थिति और सामाजिक स्थिति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है मिष्टी योजना ने वहां पर रहने वाले समुदायों के लिए एक जीविका का मौका दिया है और वहां की अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति में भी बड़ा योगदान दिया है। 

1. वहां पर रहने वाले समुदायों के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार 

मिष्टी योजना के जरिए वहां के पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिला है और माइक्रो आधारित उत्पादों की बिक्री के जरिए वहां पर जितने भी समुदाय हैं।  उनकी आर्थिक स्थिति में और आय में भी वृद्धि हुई है और उन्हें एक कमाने का जरिया मिला है।

मिष्टी योजना के कारण वहां के क्षेत्र में स्वास्थ्य से संबंधित और शिक्षा से संबंधित बड़े-बड़े सुधार हूए है , जिस कारण वहां पर स्थानीय समुदायों की सामाजिक स्थिति में उन्नति दिखाई दिए हैं। 

2. मैंग्रोव वनों की तादाद में बढ़ोतरी 

मिष्टी योजना के कारण देश के तटीय क्षेत्रों में माइक्रो वनों की संख्या में एक बहुत बड़ी वृद्धि हुई है।  इस योजना के चलते जो भी मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र खत्म होने की कगार पर थे उनका दोबारा से विकास में मदद मिली है और क्षेत्र में जीव जंतुओं की जातियों का भी संरक्षण हुआ है।

मैंग्रोव वनों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसके जरिए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को काम किया गया है जिससे की माइक्रो वनों ने कार्बन को सुखाकर और समुद्र के स्तर में वृद्धि के प्रभाव को काम किया है। 

3. प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में योगदान 

समुद्री क्षेत्र के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात, बाढ़ और तूफान जैसे प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को मिष्टी योजना के जरिए कम करने में सहायता मिली है।

मैंग्रोव वन प्राकृतिक बचाव के रूप में कार्य करते हैं। जिसमें कि वह हवाओं और लहरों की तेज गति को कम करके तट पर रहने वाले समुदायों को प्राकृतिक आपदाओं के दुष्प्रभाव से बचते हैं।  इस योजना ने इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसानों को काफी कम करने में सहायता की है और जो समुदाय प्रभावित है उन्हें जल्दी ही दोबारा सही रखने में मदद की है। 

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ 

 जैसा कि हम सबको यह विदित है कि मिष्टी योजना ने तटवर्ती क्षेत्र के कल्याण और आर्थिक सुधारो में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है लेकिन, इस योजना को लागू करने में कई चुनौतियो का भी सामना करना पड़ा है जिनमें से मुख्य निम्न है: 

1. मिष्टी योजना के प्रति मानसिक जागृति में कमी 

इस योजना को लाने के लिए सबसे बड़ी चुनौती है,  वहां के रहने वाले स्थानीय समुदायों के बीच इस योजना के लाभों के प्रति जागरूकता की कमी है उनके अंदर यह जागृति लाना सच में एक बड़ी चुनौती है ।  जहां उन्हें मैंग्रोव वनों के महत्व और तटीय पारिस्थितिक तंत्र में उनकी भूमिका को समझाना है। 

2. वित्तीय समस्याएं 

इस योजना को लाने के लिए बेहद जरूरी वित्तीय संसाधनों की जरूरत है और धन संबंधी समस्याओं और अभाव एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। 

3. भूमि का उपयोग संबंधी समस्याएं 

तीसरी सबसे बड़ी समस्या जो सामने आई वह है ,  कि जहां मैंग्रोव के वनों को बढ़ाने और वृक्षारोपण करने के लिए सही भूमि का चुनाव किया गया था।  वहां पर अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग में वह भूमि लाई जा रही है। 

इन चुनौतियों को निपटने के लिए क्या उपाय लगाए गए 

1. स्थानीय समुदायों के बीच जागरूकता को बढ़ाकर 

मैंग्रोव वनों के बारे में और उसके गुणवत्ता और महत्व को समझाते हुए साथ ही साथ मिष्टी योजना के फायदे के बारे में वहां के स्थानीय समुदायों को समझने के लिए सामुदायिक गतिशीलता और जागरूकता को बढ़ाने वाली गतिविधियों को शुरू किया जा सकता है। 

2. सहयोग, चाहे वह सार्वजनिक हो या फिर निजी हो 

मिष्टी योजना को शुरू करने के लिए जो वित्तीय आवश्यकता है उसमें सार्वजनिक और निजी भागीदारी को सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। 

3. भूमि का उपयोग नियोजित करना 

जो भूमि मैंग्रोव वृक्षारोपण के लिए सही है उसे भूमि का उपयोग केवल और केवल मैंग्रोव वन वृक्षारोपण के लिए ही किया जाए ना कि अन्य किसी उद्देश्य के लिए यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। 

FAQs

 Mishti Yojana क्या है?

मैंग्रोव तटीय  पारिस्थितिक तंत्र का एक अनिवार्य कारक है जो की काफी पारिस्थितिक और सामाजिक, आर्थिक फायदे देता है।  वैसे तो यह वन काफी सारे मानवीय और प्राकृतिक कारकों की वजह से संकट में आ गया है।  जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, वनों की कटाई और शेहरों का अधिक हस्तक्षेप।  इन खतरों से दूर होने के लिए मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के लिए सरकार ने मिष्टी योजना का आरंभ किया है. 

Mishti Yojana scheme full form 

Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes (MISHTI) scheme, (तटरेखा आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल) .

Mishti yojana कब शुरू की गई थी?

मिष्टी योजना का शुभारंभ वर्ष 2023 के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा इस योजना की घोषणा की गई थी. 

Mishti yojana किस मंत्रालय ने शुरू की?

इस योजना के अंतर्गत 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया था और “केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री”  ने मिष्टी योजना की शुरुआत की थी. 

भारत सरकार द्वारा शुरू की गई मिष्टी नामक योजना का उद्देश्य क्या है? 

मिष्टी योजना का खास उद्देश्य केवल स्थाई आजीविका के अवसरों के जरिए वहां के समुदायों की सामाजिक -आर्थिक स्थिति में सुधार करना है और भारत के जितने भी तटीय क्षेत्र हैं वहां मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षित और स्थापित करना है. 

विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव कहाँ स्थित है?

विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव भारत के पश्चिम बंगाल में सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र है. 

Mishti Yojana को कैसे वित्त पोषित किया जाता है?

मिष्टी योजना के लिए वित्त पूर्ति हेतु पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय साथ ही साथ संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के जरिए भागीदार संगठनों के समर्थन से वित्तीय प्रदान किया जाता है. 

निष्कर्ष

इस लेख क माध्यम से हमने आपको मिष्टि योजना क बारे में बताया. जो वनों को सुरक्षित रखने क लिए चलाई जा रही परियोजना हैं. इस लेख में हमने इसके लाभ-हानि, इनके उद्देश्य और इनसे होने वाले प्रभाव को अच्छे से समझने का प्रयास किया हैं.

इस योजना क विपक्ष में होने वाली आलोचनाएँ, इसकी कमियां और उसमे किये जाने वाले सम्भावित सुधार कार्यों का विश्लेषण किया हैं. जिससे आपको इसे अच्छा या बुरा समझने में आसानी हो. यह निर्णय पूरा आपका ही होगा

अगर आपको इस लेख से संबंधित कोई भी राय या प्रश्न हो तो हमारे साथ टिप्पणी के माध्यम से सांझा अवश्य करें। आपकी प्रतिक्रिया हमे आपके लिए और अधिक महत्वपूर्ण लेख लिखने के लिए प्रेरित करती हैं।

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